चुनावी चाणक्य च्ज्ञ यानी प्रशांत किशोर, सिर्फ नाम ही काफी है …

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बिहार में नीतीश कुमार और पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा चुके प्रशांत किशोर की पहचान ऐसे चाणक्य के तौर पर की जाती है।
भारत में चुनावी रणनीतिकार के तौर पर करियर की शुरुआत करने से पहले प्रशांत किशोर संयुक्त राष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े अभियान में नौकरी करते थे। 34 साल की उम्र में अफ्रीका से संयुक्त राष्ट्र की नौकरी छोड़ कर किशोर 2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम में शामिल हुए और 2012 के विधानसभा चुनाव में मोदी की पॉलिटिकल ब्रांडिंग का कार्य शुरू किया। जिसके बाद किशोर ने 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के अभियान को मोदी लहर में तब्दील करने में अहम भूमिका निभाई। लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से प्रशांत किशोर की मतभेद की खबरों के बीच उन्होंने जेडीयू का दामन थामा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निवास पर रहते हुए 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाई। नीतीश कुमार के जनसंपर्क अभियान श्हर-घर दस्तकश् और श्बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार हैश् जैसे लोकप्रिय नारे के पीछे किशोर ही थे। ऐसा माना जाता है कि एक दूसरे के धुर विरोधी जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस का महागठबंधन बनवाने में उनकी अहम भूमिका रही। इस चुनाव में बीजेपी को तगड़ी हार का सामना करना पड़ा। सरकार गठन के बाद नीतीश सरकार के परामर्शी और बिहार विकास मिशन के शासी निकाय के सदस्य के तौर पर प्रशांत किशोर को मंत्री का दर्जा प्राप्त था। बहरहाल प्रशांत किशोर को यह भूमिका रास नहीं आई नीतीश सरकार के गठन के बाद उन्होंने अपनी भूमिका मुख्यमंत्री आवास से बाहर ज्यादा मुनासिब समझी। लिहाजा बिहार विकास मिशन के शासी निकाय के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी के प्रचार अभियान का काम किया, जिससे कि जगनमोहन रेड्डी की आंध्र प्रदेश की सत्ता हासिल करवाई। इसके साथ प्रशांत किशोर 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान से जुड़ें। कैप्टन अमरिंदर सिंह के श्कॉफी विद कैप्टनश् और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (तब उपाध्यक्ष थे) की किसान यात्रा और खाट सभा की रूप रेखा भी तैयार की। किशोर के किसी भी दल के साथ काम करने की पहली शर्त यह होती है कि वे उस नेता के घर से ही अपने दफ्तर का संचालन करते हैं। लेकिन कांग्रेस में यह संभव न हो सका प्रशांत किशोर की कांग्रेस की रणनीति में दखल कई कांग्रेसी पचा नहीं पाए और खुले तौर पर इसकी मुखालफत की। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए संभावनाएं मजबूत करने की कोशिश में रणनीतिकार के तौर पर किशोर नाकाम रहे। हालांकि किशोर से जुड़े सूत्र यूपी में कांग्रेस की दुर्दशा के लिए ग्रैंड ओल्ड पार्टी के नेतृत्व को ही जिम्मेदार ठहराते हैं। किशोर के एक सहयोगी का कहना है, ‘अगर कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को यूपी में मुख्यमंत्री के लिए अपने चेहरे के तौर पर पेश करने की सलाह को मान लिया होता तो मुस्लिम एकमुश्त कांग्रेस की ओर लौट सकते थे और वो चुनाव जीत सकते थे.’। प्रशांत किशोर ने साल 2013 में सिटीजन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस के जरिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ युवा प्रोफेशनल्स को जोड़ने का व्यापक अभियान चलाया। इस टीम में आईआईटी, आईआईएम और दिल्ली विश्वविद्यालय से युवा काफी संख्या में जुड़ें। जब भाजपा की सरकार बनी तो इन युवाओं को सरकार के साथ जोड़ने की रणनीति बनी ताकि इनका पुनर्वास किया जा सके। इसी टीम के प्रोफेशनल्स को किसी मंत्री के साथ, कुछ को नीति आयोग तो कुछ लोगों को पार्टी और उससे जुड़े थिंक टैंक से जोड़ा गया। एक बड़ा समूह भाजपा महासचिव राम माधव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल के बेटे शौर्य डोवाल के थिंक टैंक इंडिया फाउंडेशन से जुड़ा। 2019 के चुनावी एजेंडा तैयार करने के लिए प्रशांत किशोर की संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (प्-च्।ब्) ने जुलाई में नेशनल एजेंडा फोरम लांच किया जिसके माध्यम से हाल ही में देश के प्रधानमंत्री के तौर पर चेहरों को लेकर सर्वेक्षण कराया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से तीन गुनी ज्यादा होने का दावा किया गया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए चुनावी रणनीति बना रहे हैं। इसके बाद वे तमिलनाडु में द्रविड मुनेत्र कड़गम नेता एमके स्टालिन के लिए काम करेंगे। प्रशांत किशोर तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2021 में डीएमके की जीत के लिए जनवरी 2020 के बाद काम में जुट जाएंगे। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी के खिलाफ ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रणनीति बनाने में व्यस्त प्रशांत किशोर की कंपनी श्आईश्पैकश् अब तमिलनाडु में डीएमके सुप्रीमो एमके स्टालिन के पक्ष में काम करने जा रही है। इस बाबत प्रशांत किशोर व एमके स्टालिन के बीच बातचीत हो चुकी है। तमिलनाडु में जयललिता और करुणानिधि के निधन के बाद साल 2021 में पहला विधानसभा चुनाव 2021 में होने जा रहा है। इस चुनाव में ऑल इंडिया द्रविड मुनेत्र कड़गम और डीएमके की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। फिल्म स्टार कमल हासन और रजनीकांत भी चुनाव मैदान में नजर आएंगे। रजनीकांत ने तो अपनी अलग पार्टी बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। कमल हासन की पार्टी एमएनएम भी पीछे नहीं दिख रही। जरूरत पड़ी तो कमल हासन व रजनीकांत हाथ भी मिला सकते हैं। तमिलनाडु की इस कड़ी राजनीतिक लड़ाई में डीएमके की तरफ से प्रशांत किशोर की एंट्री को बड़ी घटना माना जा रहा है। 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए प्रशांत किशोर साल भर पहले से ही एमके स्टालिन के लिए सियासी जमीन तैयार करना चाहते हैं। एम. करुणानिधि और जयललिता के निधन के बाद तमिलनाडु की सियासत में कोईबड़ा चेहरा नजर नहीं आ रहा। ऐसे में स्टालिन के सामने खुद को बड़ा चेहरा के रूप में स्थापित करने की चुनौती है। गत लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 38 सीटें जीतीं थीं, लेकिन विधानसभा चुनाव की राह आसान नहीं दिख रही। इसमें स्टालिन को कमल हासन और रजनीकांत से कड़ी चुनौती मिल सकती है। विदित हो कि प्रशांत किशोर देश में बड़े चुनावी रणनीतिकार के रूप में स्थापित हो चुके हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए चुनावी रणनीति बनाने के बाद वे चर्चा में आए थे। तक एनडीए की भारी जीत के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन इसके बाद बीजेपी से उनके संबंध पहले जैसे नहीं रहे। फिर वे जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के संपर्क में आए और बिहार में महागठबंधन की जीत के साथ बीजेपी की हार की पटकथा लिखने में अहम भूमिका अदा की। आगे वे जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए। प्रशांत किशोर की कंपनी ने दलों व गठबंधनों की सीमाओं से हटकर काम किया है। उनकी टीम ने आंध्रप्रदेश में वाइएसआर कांग्रेस के लिए काम करते हुए एन.चंद्रबाबू नायडू जैसे सियासी धुरंधर की हार की पटकथा लिखी। वहां वाइएस जगनमोहन रेड्डी मुख्यमंत्री बने। उनकी टीम ने अन्य कई राज्यों में विभिन्न दलों के लिए काम किया है। वर्तमान में प्रशांत किशोर की टीम पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए काम कर रही है। माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के उपचुनावों में तृणमूल कांग्रेस की जीत में प्रशांत किशोर का बड़ा योगदान है। प्रशांत किशोर ने पिछले साल शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। हालिया चुनाव में शिवसेना के एनडीए से अलग होकर सरकार बनाने में भी प्रशांत किशोर की भूमिका तलाशी जा रही है।

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