क्या PIB & RNI का नाम बदलेगा

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हर कोई यही कह रहा है कि वर्तमान सरकार नाम बदलने के अलावा बढ़ोतरी और विकास से संबंधित कोई काम नहीं कर रही है। अब नंबर है PIB & RNI की।’भारतीय सूचना सेवा‘ में पुनर्गठन की कवायद चल रही है। इसके लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में कमेटी ने अपनी कुछ सिफारिशें तैयार की हैं। इसमें ‘भारतीय सूचना सेवा’ का दायरा और बढ़ाकर दोगुने से ज्यादा करने, टॉप लेवल पर नई पोस्ट तैयार करने, विभिन्न मंत्रालयों में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की पोस्टिंग करने और न्यू मीडिया विंग्स स्थापित करने जैसी सिफारिशें शामिल हैं। ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्युनिकेशन’ के डायरेक्टर जनरल सत्येंद्र प्रकाश की अध्यक्षता में गठित ब्ंकतम त्मअपमू ंदक त्मेजतनबजनतपदह ब्वउउपजजमम (ब्त्त्ब्) में 10 सदस्य शामिल हैं। बताया जाता है कि कमेटी की ओर से जल्दी ही इन सिफारिशों को लेकर सरकार के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी। बता दें कि ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन, सूचना-प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाली मीडिया यूनिट है, जबकि भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों का चयन केंद्रीय लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित सिविल सर्विसेज परीक्षा के तहत किया जाता है। भारतीय सूचना सेवा सरकारी कम्युनिकेशन का प्रमुख आधार है और यह सरकार व मीडिया के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कमेटी ने भारतीय सूचना सेवा में वर्तमान में 971 पदों के विपरीत इनकी संख्या बढ़ाकर 2244 करने का सुझाव रखा है, ताकि कम्युनिकेशन नेटवर्क को और बढ़ाया जा सके। इसके साथ ही आईआईएस अधिकारियों के शीर्ष पदों में बढ़ोतरी की भी सिफारिश की गई है। इनमें प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल लेवल की दो अतिरिक्त पोस्ट के अलावा डायरेक्टर जनरल लेवल की 4 पोस्ट और एडिशनल डायरेक्टर जनरल लेवल की 56 पोस्ट क्रिएट करने की सिफारिश भी शामिल है। इन सिफारिशों में कहा गया है कि 150 पोस्ट रिजर्व रखी जानी चाहिए, जो वर्तमान में नहीं है जबकि, ‘कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग’ की गाइडलाइंस के अनुसार ऐसा करना आवश्यक है। इन सिफारिशों में ग्रुप ए कैडर की लगभग आठ प्रतिशत पोस्ट को ट्रेनिंग, प्रोबेशन, डेपुटेशन और छुट्टी आदि के लिए रिजर्व रखा गया है, जबकि बी कैडर में यह संख्या पांच प्रतिशत रखी गई है। कमेटी ने क्पतमबजवतंजम ळमदमतंस व िडमकपं त्मेमंतबी ंदक ज्तंपदपदह (क्ळडत्ज्)के नाम से एक विंग गठित करने की सिफारिश भी की है। यह भी कहा गया है कि इस समय काम कर रही मीडिया यूनिट म्समबजतवदपब डमकपं डवदपजवतपदह ब्मदजतम(म्डडब्) और छमू डमकपं ॅपदह(छडॅ) को आपस में मिला देना चाहिए और इसे क्ळडत्ज् के तहत ले आना चाहिए। नई विंग मीडिया, सोशल मीडिया, फीडबैक और रिसर्च की मॉनीटरिंग के साथ ही उसका विश्लेषण भी करेगी। इस समय म्डडब् टीवी चैनल्स की मॉनीटरिंग करती है कि वे प्रोग्राम और एडवर्टाइजिंग के लिए तय नियमों का पालन कर रहे हैं अथवा नहीं, वहीं छडॅसोशल मीडिया के विश्लेषण का काम देखती है। इस रिपोर्ट में ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ न्यूज’ के नाम से एक और विंग प्रस्तावित की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ के तहत लाना चाहिए जो ‘ऑल इंडिया रेडियो’ और ‘दूरदर्शन’ की न्यूज डिवीजन की देखरेख करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों विंग-क्ळडत्ज् और क्पतमबजवतंजम ळमदमतंस व िछमूे की कमान प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल लेवल के ऑफिसर के हाथ में दी जानी चाहिए। कमेटी की सिफारिशों में फिल्म संबंधी कार्यों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए डीजी रैंक के अफसर के नेतृत्व में ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फिल्म्स’ के नाम से एक और विंग बनाने की बात कही गई है।देश की दो तिहाई जनसंख्या 35 साल से कम उम्र वालों की है। ऐसे में इस आयुवर्ग के लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा पहुंच बढ़ाने के लिए कमेटी ने डिजिटल को ज्यादा बढ़ावा देने की बात अपनी सिफारिशों में शामिल की है। कमेटी का कहना है कि सरकार को कम्युनिकेशन के लिए पुराने तरीकों से अलग हटकर काम करना चाहिए। ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ के डाटा का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में इंटरनेट सबस्क्राइबर्स की संख्या वर्ष 2007 में 40 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2019 में 665 मिलियन हो गई है और यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर बेस बन चुका है।मीडिया कंटेंट की शिकायत की जांच आईआईएस को करनी चाहिए। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि मीडिया कंटेंट संबंधी शिकायतों की जांच करने वाली ‘स्क्रूटनी कमेटी’ और ‘इंटर मिनिस्ट्रियल कमेटी’ को नई विंग क्ळ ब्वदजमदज ब्वउचसंपदज त्मकतमेेंस में शामिल करना चाहिए। इसे क्ळडत्ज् के तहत लाया जाना चाहिए। यह भी कहा गया है कि क्ळडत्ज् के तहत इस नई विंग को ैमबतमजंतपंज व िजीम ब्वउउपजजममकी भूमिका निभानी चाहिए। इसका काम एडवर्टाइजिंग कंटेंट पर नजर रखने के लिए ‘बीओसी’ में गठित ब्वउउपजजमम वित ब्वदजमदज त्महनसंजपवद पद ळवअमतदउमदज ।कअमतजपेपदह(ब्ब्त्ळ।) के लिए होना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि ‘प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो’ का नाम बदलकर ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन’ और ‘बीओसी’ का नाम बदलकर ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन कर देना चाहिए। इसके साथ ही ‘रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया’ का नाम बदलकर ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिग’ करने की सिफारिश की गई है। त्छप् की भूमिका को बढ़ाकर मल्टीपल सिस्टम ऑपरेटर्स की लाइसेंसिंग तक करने के लिए कहा गया है। इस कमेटी की रिपोर्ट में यह सिफारिश भी की गई है कि भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को निश्चित समय सीमा के लिए ‘प्रसार भारती’ में तैनात करना चाहिए, जहां उन्हें संस्थान का हिस्सा माना जाना चाहिए। अभी तक भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी सिर्फ ।प्त् और क्क् में तैनात किए जाते हैं। कमेटी की सिफारिशों के अनुसार, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से मंत्रालयों में तैनात किया जाना चाहिए और प्रत्येक मंत्रालय में एक कम्युनिकेशन डिवीजन बनाई जानी चाहिए। रिपोर्ट में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ की कैडर कंट्रोल विंग में तैनाती की सिफारिश भी की गई है। कमेटी ने रेवेन्यू, कस्टम, रेलवे और पोस्टल की तर्ज पर इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस बोर्ड अथवा इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन बोर्ड गठित करने की सिफारिश भी की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस बोर्ड को ही ग्रुप ए और बी के आईआईएस अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर की जिम्मेदारी भी दी जानी चाहिए। इसके अलावा सूचन-प्रसारण मंत्रालय में पॉलिसी तय करने वाले पदों पर भी आईआईएस अधिकारियों को शामिल करने की सिफारिश इस रिपोर्ट में की गई है।

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