झारखंड में पर्दे के पीछे कारपोरेट वार

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कहने को तो झारखंड विधानसभा 2019 का चुनाव हो रहा है, लेकिन पर्दे के पीछे मिनी कॉरपोरेट वार चल रहा है। झारखंड की अपार खनिज संपदा का दोहन इसके मूल में है। एक ओर सरकार की कृपा पात्र नयी कारपोरेट लॉबी है तो दूसरी ओर पुराने घराने हैं।इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अम्बानी के चैनल के संपादकीय विभाग को साफ तौर प रहिदायत दी गयी है कि झारखंड भाजपा के बागी नेता सरयू राय की कोई भी सकारात्मक खबर नहीं चलानी है। इसकी पुष्टि चैनल के अंदरूनी सूत्रों ने की है। दरअसल, रघुबर सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री सरयूराय का जमशेदपुर पश्चिम से भाजपा ने टिकट काट दिया है। इसके बाद राय भाजपा से बगावत कर मुख्यमंत्री दास के खिलाफ जमशेदपुर पूर्वी से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं। इस मामले को लेकर मचे घमासान के पीछे भी कॉरपोरेट इंट्रेस्ट को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, क्योंकि सरयू राय ने झारखंड में लूट के खिलाफ बिगुल बजा रखा है।दरअसल झारखंड खनिज संपदा में अग्रणी प्रांत है। यहां कई प्रकार के मूल्यवान खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इसके अलावा प्रचुर मात्रा में वन संपदा भी झारखंड के पास है।आंकड़े बताते हैं कि देश की अधिकतर ताप विद्युत्त परियोजना झारखंड के कोयले से चल रही है। लौह अयस्क के मामले में भी झारखंड धनी प्रांतों में से एक है। ऐसे में झारखंड में कॉरपोरेट का इंट्रेस्ट स्वाभाविक हो जाता है। यह कोई नई बात नहीं है। इन प्राकृतिक संपदाओं के दोहन को लेकर औद्योगिक और व्यापारिक घरानों के बीचवर्चस्व की लड़ाई भी पुरानी है। पहले भी भारत में कॉरपोरेट घरानों के बीच जंग की खबर आती रही है। झारखंडपहलेभीइसकाकेन्द्ररहाहै।संयुक्तबिहारऔरउसकेबादझारखंडमेंटाटा, बिरला, डिन्हाल्को, उषामार्टिन, रुंगटामाइंसबड़ाकॉरपोरेटप्लेयरथा, लेकिनजबसेभारतीय जनतापार्टीकाउभारहुआहै, तबसेझारखंडमेंकुछ नए कॉरपोरेटप्लेयरभीबड़ीतेजीसेउभरेहैं, जिसमेंअडानी, अंबानी, जिंदल, एसआरआदिकानामविशेष रूप सेलियाजासकताहै।यहीनहींझारखंड की सबसेप्रभावशालीमारवाड़ीलॉबीभीझारखंड की राजनीतिमें न केवलहस्तक्षेपकरतीरहीहै, बल्कि समय-समय परइसराजनीतिकोप्रभावितभीकरतीरहीहै।भारतीय जनतापार्टीमेंरघुबर के उभारसेइसलॉबीकोअबपरेशानीहोनेलगीहै।दरअसल, रघुबरदास की लॉबी ने एक रणनीति के तहतप्रदेशमेंनए-नए कॉरपोरेटको खड़ाकरदियाहै।हालांकिइसकेलिए केन्द्र की वर्तमानभाजपालॉबीभीजिम्मेदारहै।इस नए व्यापारिकसमीकरण के उभार के कारणपुरानेव्यापारिक घरानेबेहददबावमहसूसकररहेहैं।भाजपाकिकेन्द्रऔरराज्य सरकार ने झारखंडमें एसआर, एम्टापॉवर, अडानी, जिंदलकोज्यादामहत्वदियाहै।इसकेअलावासरकारीठेकेपट्टेमेंभीबड़ीकंपनियों के स्थानपरस्थानीय ठेकेदारोंकोभाजपा ने प्रश्रय दियाहै।इसकेकईउदाहरणहैं।भाजपा की इसरणनीति के कारणपुरानेकॉरपोरेट घरानेऔरप्रदेशकाप्रभावशालीव्यापारी एवंअभिजात्य समुदाय सरकार के खिलाफमोर्चा खोलदियाहै।कुछआंतरिक रूप सेतोकुछवाह्य रूप सेभाजपा के विरोधियोंकोसहयोगकरनेलगेहैं।अभीहालहीमेंझारखंडचेंबरआफकॉमर्स ने बाकायदा पत्रकारवार्ताकरभाजपा के खिलाफपूरेप्रदेश के 13 विधानसभा क्षेत्रोंसेअपनेउम्मीदवारकोउतारने की घोषणाकरदीहै।चेंबर ने पत्रकारवार्ता के दौरानरघुबरसरकारपरकईगंभीरआरोपभीलगाए।इससेसाफलगनेलगाहैकिप्रदेशमेंकॉरपोरेट घरानों के बीचजमकरलड़ाईप्रारंभहोगयीहै।राजनीतिकजानकारों के मुताबिकभाजपा के साथआलझारखंडस्टूडेंट यूनियन (आजसू पार्टी) का समझौते के टूटनेकारणभीकॉरपोरेटवारहीहै।आजसू के केन्द्रीय अध्यक्ष सुदेशमहतो के बारेमें यह चर्चाआमहैकि उनके संबंध मूरीस्थितहिंडाल्को के साथबेहद मधुरहैं।दूसरीओररघुबरसरकारसेटाटाकाप्रबंधनको खफाबतायाजारहाहै।इसकाप्रभावसमाचारमाध्यमोंपरभी देखनेको मिल रहाहै।राजनीतिकजानकारोंकीमानेंतोरघुबरदास के खिलाफकॉरपोरेट की पुरानीलॉबीजबरदस्ततरीकेसेसक्रिय है, जबकि नए कॉरपोरेट घरानेभाजपाकोसहयोगकररहेहैं।प्रदेशमेंजोअप्रत्याशितराजनीतिकसमीकरणोंमेंपरिवर्तनहुआहै, वहसंयोगनहींहैबल्किकॉरपोरेट घरानों की चालहै। यदिभाजपा की झारखंडमेंजीतहोतीहैतो यह मानलेनाचाहिए किपुरानेकॉरपोरेट के दिनझारखंडसेलद गए औरउन्हेंरघुबर के रहमोकरमपर यहांव्यापारकरनाहोगा।यदि ऐसानहींहुआतोफिरझारखंड एक नए तरीके के कॉरपोरेटवारमेंफंसजाएगा।हालांकिपुरानीकॉरपोरेटलॉबीभीकमजोरनहींहै, लेकिन नए के साथसरकार खड़ीदिख रहीहै।इसलिए संभावनाएंकुछऔरसंकेत दे रहीहैं।इसचुनावमेंप्रभावशालीव्यापारिकसमूहजोप्रदेश के चेम्बरकोलीडकरतेहैं, उनकीभीस्थितिकमजोरहोगी।फिरचेंबरकोभीअपनीरणनीतिमेंपरिवर्तनकरनापड़ सकताहै।

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