पर्व

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विवाह पंचमी
राम सीता के विवाह के सालगिरह के कारणविवाह पंचमी मनायी जाती है। विवाह पंचमीका दिन राज्याभिषेक तथा विवाह संस्कार शुभ माने जाते हैं। इस दिन विवाह करने से कन्या का सुहाग अखंड रहता है। इस दिन फलाहार व्रत रखें।श्री रामचरितमानस में वर्णित सीता राम विवाह प्रसंग की कथा कहें तथा सुनें।सीता राम विवाह का आयोजन करें।मंदिर में अखण्ड मानस पाठ कराएं। जिन लोगों का दाम्पत्य जीवन ठीक नहीं है वह इस पुनीत पर्व पर सीता राम विवाह कराकर भंडारा कराएं।धार्मिक पुस्तक का दान करें।घर में कई दीपक जलाएं।घर के मंदिर में घी का अखंड दीप जलाएं।इस दिनपत्नी का अपमान ना करें।असत्य ना बोलें।घर में गंदगी मत हो।अन्न का सेवन मत करें।इस प्रकार विवाह पंचमी एक महान पर्व है। इस पावन तिथि पर भगवान राम तथा माता सीता का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य बनाएं।

मोक्षदा एकादशी
पितरों के लिए मोक्ष के द्वार खोल देने वाली इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इस एकादशी के दिन व्रत रखने से पूर्वजों के लिए स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं. साथ ही यह भी माना जाता है कि मोक्षदा एकादशी के दिन व्रत रखने से मनुष्यों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं. बता दें मोक्षदा एकादशी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण के मुख से श्रीमदभगवद् गीता का जन्म हुआ था. इसीलिए मोक्षदा एकादशी के दिन ही गीता जयंती भी मनाई जाती है. मोक्षदा एकादशी के लिए दशमी की रात्रि के प्रारंभ से द्वादशी की सुबह तक व्रत रखें.सुबह स्नान के बाद धूप, दीप और तुलसी से भगवान विष्णु के साथ कृष्ण जी की भी पूजा करें.व्रत का संकप्ल लें और व्रत कथा पढ़ें. फिर आरती कर प्रसाद बांटें. पूजा के दौरान भगवान को फलाहार चढ़ाएं.पूजा करने से पहले और स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूरे घर में गंगाजल छिड़कें.पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक मोक्षदा एकादशी का व्रत बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-पाठ और कीर्तन करने से पाप का नाश होता है. इसीलिए इस दिन पापों को नष्ट करने और पितरों के लिए मोक्ष के द्वार खोलने के लिए श्री हरि की तुलसी की मंजरी और धूप-दीप से पूजा की जाती है.

हनुमान जयंती
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के अलावा चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को भी हनुमान जंयती मनाई जाती है। ज्योतिष के अनुसार इस बार दो शुभ संयोग में हनुमान जन्मोत्सव का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाई जाएगी। हनुमान जयंती पर गजकेसरी योग और चित्रा नक्षत्र बन रहा है। इस शुभ संयोग में बजरंगबली की आराधना करने और कुछ उपाय करने से भगवान हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्ति होती है। हनुमान जयंती पर कृपा पाने के लिए सुबह और शाम के समय हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। हनुमान जयंती का दिन हनुमत साधकों के लिए महापर्व के समान होता है। इस दिन बजरंग बली को विधि-विधान से चोला चढ़ाने से हर बिगड़ा काम बन जाता है और साधक पर हनुमानजी की विशेष कृपा होती है। यदि आप लंबे समय से किसी परेशानी से घिरे हुए हैं तो उससे निजात पाने के लिए हनुमान जयंती के दिन स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करके किसी मंदिर में या घर पर बजरंग बली की मूर्ति या चित्र के सामने सिंदूरी चोला चढ़ाएं। अगर आपके काम में लगातार बाधाएं आ रही हैं और तमाम कोशिशों के बावजूद काम नहीं बन रहा है, तो हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली को इत्र और गुलाब की माला चढ़ाएं। नुमान जी को लाल फूल प्रिय है इसलिए पूजा में लाल फूल ही चढ़ाएं। ध्यान रहे हनुमान चालीसा का पाठ हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुंह करके ही करना चाहिए। बजरंगबली को भोग लगाने के बाद हनुमान जी के सामने बैठकर तुलसी की माला से मंत्रों का जाप जरूर करना चाहिए। व्यापार में तरक्की पाने के लिए हनुमान जयंती पर सिंदूरी चोला चढ़ाना चाहिए। संकटों से निजात पाने के लिए हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा, बजरंग पाठ और हनुमान कवज का पाठ करें। हनुमान जंयती पर हनुमान मंदिर जाकर भगवान हनुमान के दर्शन करना चाहिए। मंदिर में हनुमान प्रतिमा के समाने मनचाही मनोकामना मांगे। नौकरी और परीक्षा में सफल होने के लिए हनुमान जयंती पर बजरंगबली को बूंदी के लड्डू जरूर चढ़ाएं।चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को मनाया जाता है हनुमान जयन्ती का त्योहार। शास्त्रों के अनुसार हनुमान जयन्ती कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी और चैत्र शुक्ल पूर्णिमा दोनों दिन मनाई जाता है। इस विषय में ग्रंथों में दोनों के ही उल्लेख मिलते हैं। चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के दिन मनाई जाने वाली हनुमान जयंती हनुमान जी का जन्मदिन का पर्व मानया जाता है।कहा जाता है कि हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए भगवान राम की भक्ति भी करनी चाहिए। । हनुमान जी ने अपने जीवन को श्रीराम को समर्प्रीत किया है। ये अमर और चिरंजीवी है। इनकी भक्ति करने से मनुष्य को शक्ति और समर्पण प्राप्त होता है। इस दिन हनुमान जी सभी भक्तों की मुरादें पूरी करते हैं।इस दिन हनुमान जी ये 5 चीजें अर्पित करनी चाहिए। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए तिल के तेल में नारंगी सिंदूर घोलकर चढ़ाएं। हनुमान जी को चमेली की खुश्बू या तेल और लाल फूल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा हनुमान जी की कृपा पाने के लिए 11 लडडू चढ़ाने चाहिए। हनुमान जी पर जल चढ़ाने के बाद पंचामृत चढ़ाना भी अच्छा होता है।

खरमास
हिंदू धर्म में इस दौरान सभी पवित्र काम वर्जित माने गए हैं. माना जाता है कि यह मास मलिन होता है. इसलिए इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृहप्रवेश आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं. मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मलमास पड़ गया है.ग्रंथों के अनुसार भगवान सूर्यदेव 7 घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते रहते हैं. उन्हें कहीं पर भी रुकने की इजाजत नहीं है. उनके रुकते ही जनजीवन भी जो ठहर जाएगा. लेकिन जो घोड़े लगातार चलने व विश्राम न मिलने के कारण भूख-प्यास से बहुत थक जाते हैं. उनकी इस दशा को देखकर सूर्यदेव का मन भी द्रवित हो गया. भगवान सूर्यदेव उन्हें एक तालाब किनारे ले गए लेकिन उन्हें तभी यह भी आभास हुआ कि अगर रथ रुका तो अनर्थ हो जाएगा. लेकिन घोड़ों का सौभाग्य कहिए कि तालाब के किनारे दो खर मौजूद थे.भगवान सूर्यदेव घोड़ों को पानी पीने व विश्राम देने के लिए छोड़ देते हैं और खर यानी गधों को अपने रथ में जोड़ लेते हैं. रथ की गति धीमी हो जाती है फिर भी जैसे-तैसे 1 मास का चक्र पूरा होता है, तब तक घोड़ों को भी विश्राम मिल चुका होता है. इस तरह यह क्रम चलता रहता है. इस दौरान लगभग सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं.खरमास में शादी जैसे कोई भी शुभ काम नहीं किए जाते. इस दौरान शुभ काम का फल नहीं मिलता.इस महीने के दौरान संपत्ति की खरीद भी बेहद अशुभ होती है. इससे बचना चाहिए.नया वाहन नहीं खरीदना चाहिए.

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